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टीईटी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अनिवार्यता बरकरार; कार्यरत शिक्षकों को मिली एक साल की अतिरिक्त मोहलत!

नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए इसकी अनिवार्यता को बरकरार रखा है। हालांकि, कार्यरत शिक्षकों को राहत देते हुए अदालत ने टीईटी उत्तीर्ण करने की समयसीमा एक वर्ष बढ़ा दी है। अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करने का अवसर मिलेगा। इससे पहले यह अंतिम तिथि 31 अगस्त 2027 निर्धारित थी। इस फैसले से यूपी के करीब पौने दो लाख शिक्षक प्रभावित होंगे।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि टीईटी की अनिवार्यता में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि मूल फैसले में बदलाव या समीक्षा करने योग्य कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को इस संबंध में राहत नहीं दी जा सकती।

हालांकि, प्राथमिक शिक्षा की निरंतरता और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए कार्यरत शिक्षकों को अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया।

राज्यों को नियमित परीक्षा कराने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और संबंधित शिक्षा प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि टीईटी परीक्षा नियमित रूप से आयोजित की जाए। अदालत ने कहा कि यदि संभव हो तो वर्ष में दो बार परीक्षा कराई जाए, ताकि शिक्षकों को परीक्षा पास करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में समयसीमा बढ़ाने की किसी भी मांग पर विचार नहीं किया जाएगा।

लाखों शिक्षकों पर पड़ेगा असर

गौरतलब है कि सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया था। अदालत ने कहा था कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर टीईटी पास करना होगा। वहीं जिनकी नौकरी पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें पदोन्नति प्राप्त करने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा।

इस फैसले के खिलाफ देशभर से 250 से अधिक समीक्षा याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इससे बड़ी संख्या में शिक्षकों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी की अनिवार्यता को शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय मानते हुए अपने पूर्व निर्णय को यथावत रखा है। अब इस फैसले के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों को निर्धारित समयसीमा के भीतर टीईटी पास करने की तैयारी करनी होगी।

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